| आज हल
हो गए प्रश्न मेरे सभी |
| अब
अन्धेरों में दीपक जलेंगे प्रिये! |
| आज तुम
मिल गए तो जहाँ मिल गया |
| अब
सितारों से आगे चलेंगे प्रिये! |
|
| आज तक
रोज़ चलता रहा जि़ंदगी |
| का सफ़र, पर मेरे पाँव चल ना सके |
| आज तक
थे तराने हृदय में बहुत |
| गीत बन
कँठ में किंतु ढल ना सके |
| आज तुम
पास हो, हैं किनारे बहुत |
| गीत में
भाव से हम ढलेंगे प्रिये! |
|
| आज
अहसास की बाँसुरी पर मुझे |
| तुम
मिलन-गीत कोई सुनाओ ज़रा |
| ये
अमा-कालिमा धुल सकेगी शुभे! |
| पास आकर
मेरे मुस्कराओ ज़रा |
| प्रेम
के ताप से मौन के हिम-शिखर |
| देखना
शीघ्र ही अब गलेंगे प्रिये! |
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